प्रबोधनकार ठाकरे

प्रबोधन डॉट कॉम के लिए प्रबोधनकारजीका यह अल्पपरिचय लिखा है, 'दोपहर का सामना'के संपादक श्री. प्रेम शुक्लाजीने...

प्रबोधनकार केशव सीताराम ठाकरे। वैसे तो उनकी पहचान एक सत्यशोधक आंदोलन के चोटी के समाज सुधारक और प्रभावी लेखक की रही है। लेकिन उनका कर्तृत्व और प्रतिभा अनेकानेक रंगों में पुष्पित-पल्लवित हुई। विचारवंत , नेता, लेखक, पत्रकार, संपादक, प्रकाशक, वक्ता, धर्म सुधारक , समाज सुधारक , इतिहास संशोधक , नाटककार, सिनेमा पटकथा संवाद लेखक , अभिनेता, संगीतज्ञ, आंदोलनकारी, शिक्षक, भाषाविद, लघु उद्योजक , फोटोग्राफर, टाइपिस्ट, चित्रकार जैसे दर्जनों विशेषण अर्पित करने के बावजूद उनका व्यक्तित्व एक दशांगुल ऊंचा ही रहेगा। उन्होंने खजूर की तरह ऊंचा होने की बजाय वटवृक्ष की तरह अपने व्यक्तित्व को विस्तृत किया। मानो एक ही व्यक्ति ने सौ लोगों का आयुष्यमान जीने का पुरुषार्थ किया हो।

सामने दिखते ही अन्याय पर टूट पडनेवाला और इसी शक्ति के बल पर बीसवीं सदी में महाराष्ट्र को एक नई दिशा देनेवाला व्यक्तित्व , मुट्ठीभर लोगों के घरों में दबे हुए सामर्थ्य के प्रकाश को अपनी बुध्दिमत्ता और आंदोलन से सर्व सामान्य घरों तक पहुंचाया। विचार और कृति के माध्यम से महाराष्ट्र का इतिहास और भूगोल बदलने का श्रेय जिन चंद लोगों के नाम दर्ज है उनमें प्रबोधनकार का नाम अग्रणी है। उन्हें किसी चौखट में फंसना अमान्य था। इसी के चलते आज भी किसी एक विचारधारा या इज्म का चश्मा डालकर उनको नहीं देखा जा सकता। वे एक ही समय बहुजनवादी भी थे और हिंदुत्ववादी भी। जिन लोगों को प्रबोधनकार अच्छे लगे उन्हें उनका ठाकरे होना नहीं पचा और जो ठाकरे होने के चलते उनके प्रेम में पत्रडे उन्हें उनका प्रबोधनकार होने का दंश सालता रहा। परिणामस्वरूप उनका कर्तृत्व सदा-सर्वदा नेपथ्य में रह गया।

बागी बचपन-

प्रबोधनकार की जन्म तारीख है 17 सितंबर, 1885 । जन्मगांव पनवेल। लेकिन ठाकरे का मूल गांव है पाली। कुछ लोग इस पाली को मध्य प्रदेश में होने का दावा करते हैं। लेकिन यह पाली और कोई नहीं बल्कि अष्टविनायक गणपति का प्रसिध्द स्थान महाराष्ट्र के रायगड जिले